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श्रीरामचरितमानस 11.3

प्रिय लागिहि अति सबहि मम भनिति राम जस संग।
दारु बिचारु कि करइ कोउ बंदिअ मलय प्रसंग ॥10(क)॥

पूरा अध्याय