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महाभारत 26.50

संप्रक्रुष्टे रुदितस्त्रीकुमारे; पराभूते पौरुषे धार्तराष्ट्रे
मया कृत्यमिति जानामि शल्य; प्रयाहि तस्माद्द्विषतामनीकम्

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