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महाभारत 26.49

हुताशनादित्यसमानतेजसं; पराक्रमे विष्णुपुरंदरोपमम्
नये बृहस्पत्युशनःसमं सदा; न चैनमस्त्रं तदपात्सुदुःसहम्

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