ग्रंथमहाभारतद्रोणपर्वअध्याय 2727.17महाभारत 27.17तथा विक्षोभ्यमाणा सा पार्थेन तव वाहिनी व्यदीर्यत महाराज नौरिवासाद्य पर्वतम्पिछलाअगलापूरा अध्याय