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महाभारत 25.58

स तेन नागप्रवरेण पार्थिवो; भृशं जगाहे द्विषतामनीकिनीम्
पुरा सुगुप्तां विबुधैरिवाहवे; विरोचनो देववरूथिनीमिव

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