ग्रंथमहाभारतद्रोणपर्वअध्याय 131131.98महाभारत 131.98स दग्ध्वाक्षौहिणीं बाणैर्नैरृतान्रुरुचे भृशम् पुरेव त्रिपुरं दग्ध्वा दिवि देवो महेश्वरःपिछलाअगलापूरा अध्याय