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महाभारत 55.108

स सप्तभिः सप्त शरप्रवेका;न्संवार्य भूरिश्रवसा विसृष्टान्
शितेन दुर्योधनबाहुमुक्तं; क्षुरेण तत्तोमरमुन्ममाथ

पूरा अध्याय