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महाभारत 55.107

अथार्जुनाय प्रजहार भल्ला;न्भूरिश्रवाः सप्त सुवर्णपुङ्खान्
दुर्योधनस्तोमरमुग्रवेगं; शल्यो गदां शांतनवश्च शक्तिम्

पूरा अध्याय