Utshovऐप डाउनलोड करें

महाभारत 115.39

तमब्रवीच्छांतनवः शिरो मे तात लम्बते
उपधानं कुरुश्रेष्ठ फल्गुनोपनयस्व मे
शयनस्यानुरूपं हि शीघ्रं वीर प्रयच्छ मे

पूरा अध्याय