Utshovऐप डाउनलोड करें

महाभारत 115.37

स संन्यस्य महच्चापमभिवाद्य पितामहम्
नेत्राभ्यामश्रुपूर्णाभ्यामिदं वचनमब्रवीत्

पूरा अध्याय