Utshovऐप डाउनलोड करें

महाभारत 36.6

नाक्रोशी स्यान्नावमानी परस्य; मित्रद्रोही नोत नीचोपसेवी
न चातिमानी न च हीनवृत्तो; रूक्षां वाचं रुशतीं वर्जयीत

पूरा अध्याय