ग्रंथमहाभारतउद्योगपर्वअध्याय 110110.15महाभारत 110.15न मे प्रयोजनं किंचिद्गमने पन्नगाशन संनिवर्त महावेग न वेगं विषहामि तेपिछलाअगलापूरा अध्याय