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महाभारत 250.2

बुद्ध्याभिजानामि नरेन्द्रपुत्र; न मादृशी त्वामभिभाष्टुमर्हा
न त्वेह वक्तास्ति तवेह वाक्य;मन्यो नरो वाप्यथ वापि नारी

पूरा अध्याय