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महाभारत 250.1

वैशंपायन उवाच
अथाब्रवीद्द्रौपदी राजपुत्री; पृष्टा शिबीनां प्रवरेण तेन
अवेक्ष्य मन्दं प्रविमुच्य शाखां; संगृह्णती कौशिकमुत्तरीयम्

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