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महाभारत 205.1

मार्कण्डेय उवाच
गुरू निवेद्य विप्राय तौ मातापितरावुभौ
पुनरेव स धर्मात्मा व्याधो ब्राह्मणमब्रवीत्

पूरा अध्याय