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महाभारत 128.10

महेश्वर उवाच
सुरभीं ससृजे ब्रह्मामृतधेनुं पयोमुचम्
सा सृष्टा बहुधा जाता क्षरमाणा पयोऽमृतम्

पूरा अध्याय