ग्रंथमहाभारतशान्तिपर्वअध्याय 327327.96महाभारत 327.96गुह्याय ज्ञानदृश्याय अक्षराय क्षराय च एष देवः संचरति सर्वत्रगतिरव्ययःपिछलाअगलापूरा अध्याय