ग्रंथमहाभारतशान्तिपर्वअध्याय 327327.95महाभारत 327.95कपर्दिने वराहाय एकशृङ्गाय धीमते विवस्वतेऽश्वशिरसे चतुर्मूर्तिधृते सदापिछलाअगलापूरा अध्याय