ग्रंथमहाभारतशान्तिपर्वअध्याय 308308.134महाभारत 308.134य इमां पृथिवीं कृत्स्नामेकच्छत्रां प्रशास्ति ह एकमेव स वै राजा पुरमध्यावसत्युतपिछलाअगलापूरा अध्याय