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महाभारत 296.33

श्रद्धान्वितायाथ गुणान्विताय; परापवादाद्विरताय नित्यम्
विशुद्धयोगाय बुधाय चैव; क्रियावतेऽथ क्षमिणे हिताय

पूरा अध्याय