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महाभारत 216.7

ब्रह्मोवाच
नैतत्ते साधु मघवन्यदेतदनुपृच्छसि
पृष्टस्तु नानृतं ब्रूयात्तस्माद्वक्ष्यामि ते बलिम्

पूरा अध्याय