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महाभारत 216.1

युधिष्ठिर उवाच
यया बुद्ध्या महीपालो भ्रष्टश्रीर्विचरेन्महीम्
कालदण्डविनिष्पिष्टस्तन्मे ब्रूहि पितामह

पूरा अध्याय