ग्रंथमहाभारतशान्तिपर्वअध्याय 144144.7महाभारत 144.7नास्ति भर्तृसमो नाथो न च भर्तृसमं सुखम् विसृज्य धनसर्वस्वं भर्ता वै शरणं स्त्रियाःपिछलाअगलापूरा अध्याय