Utshovऐप डाउनलोड करें

महाभारत 136.169

बलवत्संनिकर्षो हि न कदाचित्प्रशस्यते
प्रशान्तादपि मे प्राज्ञ भेतव्यं बलिनः सदा

पूरा अध्याय