Utshovऐप डाउनलोड करें

महाभारत 136.168

स्वस्ति तेऽस्तु गमिष्यामि दूरादपि तवोद्विजे
नाहं त्वया समेष्यामि निर्वृतो भव लोमश

पूरा अध्याय