ग्रंथमहाभारतआदिपर्वअध्याय 4343.32महाभारत 43.32न मामर्हसि धर्मज्ञ परित्यक्तुमनागसम् धर्मे स्थितां स्थितो धर्मे सदा प्रियहिते रताम्पिछलाअगलापूरा अध्याय