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महाभारत 43.31

बाष्पगद्गदया वाचा मुखेन परिशुष्यता
कृताञ्जलिर्वरारोहा पर्यश्रुनयना ततः
धैर्यमालम्ब्य वामोरूर्हृदयेन प्रवेपता

पूरा अध्याय