ग्रंथमहाभारतआदिपर्वअध्याय 166166.45महाभारत 166.45स समुद्रोर्मिवेगेन स्थले न्यस्तो महामुनिः जगाम स ततः खिन्नः पुनरेवाश्रमं प्रतिपिछलापूरा अध्याय