ग्रंथमहाभारतआदिपर्वअध्याय 166166.44महाभारत 166.44स समुद्रमभिप्रेत्य शोकाविष्टो महामुनिः बद्ध्वा कण्ठे शिलां गुर्वीं निपपात तदम्भसिपिछलाअगलापूरा अध्याय