श्रीमद्भगवद्गीता 5.28
यतेन्द्रियमनोबुद्धिर्मुनिर्मोक्षपरायणः।
विगतेच्छाभयक्रोधो यः सदा मुक्त एव सः।।5.28।।
सरल अर्थ, AI द्वारा लिखा गयाजो इन्द्रियों, मन और बुद्धि पर नियंत्रण रखता है, जो मोक्ष के प्रति समर्पित मुनि है, और जो इच्छा, भय और क्रोध से मुक्त है, वह सदा मुक्त रहता है।