श्रीमद्भगवद्गीता 4.29
अपाने जुह्वति प्राण प्राणेऽपानं तथाऽपरे।
प्राणापानगती रुद्ध्वा प्राणायामपरायणाः।।4.29।।
सरल अर्थ, AI द्वारा लिखा गयाएक प्राण को दूसरे को देता है और वही प्राण वापस लेता है; इस प्राण‑प्राण की अदला‑बदली को रोक कर वे प्राणायाम में लीन हो जाते हैं।