ग्रंथश्रीमद्भगवद्गीताअध्याय 1717.24श्रीमद्भगवद्गीता 17.24तस्मादोमित्युदाहृत्य यज्ञदानतपःक्रियाः।प्रवर्तन्ते विधानोक्ताः सततं ब्रह्मवादिनाम्।।17.24।।पिछलाअगलापूरा अध्याय