ग्रंथअथर्ववेदकाण्ड 7सूक्त 113113.2अथर्ववेद 113.2तृ॒ष्टासि॑ तृष्टि॒का वि॒षा वि॑षात॒क्यऽसि । परि॑वृक्ता॒ यथास॑स्यृष॒भस्य॑ व॒शेव॑ ॥२॥पिछलापूरा अध्याय