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अथर्ववेद 83.2

एन्येका॒ श्येन्येका॑ कृ॒ष्णैका॒ रोहि॑णी॒ द्वे।
सर्वा॑सामग्रभं॒ नामावी॑रघ्नी॒रपे॑तन ॥२॥

पूरा अध्याय