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अथर्ववेद 83.1

अप॑चितः॒ प्र प॑तत सुप॒र्णो व॑स॒तेरि॑व ।
सूर्यः॑ कृ॒णोतु॑ भेष॒जं च॒न्द्रमा॒ वोऽपो॑च्छतु ॥१॥

पूरा अध्याय