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अथर्ववेद 78.3

त्वष्टा॑ जा॒याम॑जनय॒त् त्वष्टा॑स्यै॒ त्वां पति॑म्।
त्वष्टा॑ स॒हस्र॒मायूं॑षि दी॒र्घमायुः॑ कृणोतु वाम् ॥३॥

पूरा अध्याय