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अथर्ववेद 131.1

नि शी॑र्ष॒तो नि प॑त्त॒त आ॒ध्यो॒३ नि ति॑रामि ते ।
देवाः प्र हि॑णुत स्म॒रम॒सौ मामनु॑ शोचतु ॥१॥

पूरा अध्याय