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अथर्ववेद 130.4

उन्मा॑दयत मरुत॒ उद॑न्तरिक्ष मादय ।
अग्न॒ उन्मा॑दया॒ त्वम॒सौ मामनु॑ शोचतु ॥४॥

पूरा अध्याय