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अथर्ववेद 107.4

कल्या॑णि सर्व॒विदे॑ मा॒ परि॑ देहि ।
सर्व॑विद् द्वि॒पाच्च॒ सर्वं॑ नो॒ रक्ष॒ चतु॑ष्पाद् यच्च॑ नः॒ स्वम् ॥४॥

पूरा अध्याय