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अथर्ववेद 107.2

त्राय॑माणे विश्व॒जिते॑ मा॒ परि॑ देहि ।
विश्व॑जिद् द्वि॒पाच्च॒ सर्वं॑ नो॒ रक्ष॒ चतु॑ष्पाद् यच्च॑ नः॒ स्वम् ॥२॥

पूरा अध्याय