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अथर्ववेद 25.1

उ॒त्तु॒दस्त्वोत् तु॑दतु॒ मा धृ॑थाः॒ शय॑ने॒ स्वे।
इषुः॒ काम॑स्य॒ या भी॒मा तया॑ विध्यामि त्वा हृ॒दि ॥१॥

पूरा अध्याय