ग्रंथअथर्ववेदकाण्ड 20सूक्त 8484.2अथर्ववेद 84.2इन्द्रा या॑हि धि॒येषि॒तो विप्र॑जूतः सु॒ताव॑तः । उप॒ ब्रह्मा॑णि वा॒घतः॑ ॥२॥पिछलाअगलापूरा अध्याय