ग्रंथअथर्ववेदकाण्ड 20सूक्त 6868.4अथर्ववेद 68.4परे॑हि॒ विग्र॒मस्तृ॑त॒मिन्द्रं॑ पृच्छा विप॒श्चित॑म्। यस्ते॒ सखि॑भ्य॒ आ वर॑म् ॥४॥पिछलाअगलापूरा अध्याय