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अथर्ववेद 63.5

क॒दा मर्त॑मरा॒धसं॑ प॒दा क्षुम्प॑मिव स्फुरत्। क॒दा नः॑ शुश्रव॒द् गिर॒ इन्द्रो॑ अ॒ङ्ग ॥५॥

पूरा अध्याय