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अथर्ववेद 60.5

ए॒वा हि ते॑ विभू॑तय ऊ॒तय॑ इन्द्र॒ माव॑ते । स॒द्यश्चि॒त् सन्ति॑ दा॒शुषे॑ ॥५॥

पूरा अध्याय