ग्रंथअथर्ववेदकाण्ड 20सूक्त 6060.4अथर्ववेद 60.4ए॒वा ह्य॑स्य सू॒नृता॑ विर॒प्शी गोम॑ती म॒ही। प॒क्वा शाखा॒ न दा॒शुषे॑ ॥४॥पिछलाअगलापूरा अध्याय