ग्रंथअथर्ववेदकाण्ड 20सूक्त 5656.5अथर्ववेद 56.5मा॒दय॑स्व सु॒ते सचा॒ शव॑से शूर॒ राध॑से । वि॒द्मा हि त्वा॑ पुरू॒वसु॒मुप॒ कामा॑न्त्ससृ॒ज्महेऽथा॑ नोऽवि॒ता भ॑व ॥५॥पिछलाअगलापूरा अध्याय