ग्रंथअथर्ववेदकाण्ड 20सूक्त 2626.2अथर्ववेद 26.2आ घा॑ गम॒द् यदि॒ श्रव॑त् सह॒स्रिणी॑भिरू॒तिभिः॑ । वाजे॑भि॒रुप॑ नो॒ हव॑म् ॥२॥पिछलाअगलापूरा अध्याय