Utshovऐप डाउनलोड करें

अथर्ववेद 22.5

आ हर॑यः ससृज्रि॒रेऽरु॑षी॒रधि॑ ब॒र्हिषि॑ । यत्रा॒भि सं॒नवा॑महे ॥५॥

पूरा अध्याय