सूक्त 132
132.1
खिलानि ।
आदला॑बुक॒मेक॑कम् ॥१॥
132.2
अला॑बुकं॒ निखा॑तकम् ॥२॥
132.3
क॒र्क॒रि॒को निखा॑तकः ॥३॥
132.4
तद्वात॒ उन्म॑थायति॒ ॥४॥
132.5
कुला॑यं कृणवा॒दिति॑ ॥५॥
132.6
उ॒ग्रं व॑नि॒षदा॑ततम् ॥६॥
132.7
न व॑निष॒दना॑ततम् ॥७॥
132.8
क ए॑षां॒ कर्क॑री लिखत् ॥८॥
132.9
क ए॑षां दु॒न्दुभिं॑ हनत् ॥९॥
132.10
यदी॒यं ह॑न॒त्कथं॑ हनत् ॥१०॥
132.11
दे॒वी ह॑न॒त्कुह॑नत् ॥११॥
132.12
पर्या॑गारं॒ पुनः॑पुनः ॥१२॥
132.13
त्रीण्यु॒ष्ट्रस्य॒ नामा॑नि ॥१३॥
132.14
हि॒र॒ण्य इत्येके॑ अब्रवीत् ॥१४॥
132.15
द्वौ वा॑ ये शिशवः ॥१५॥
132.16
नील॑शिखण्ड॒वाह॑नः ॥१६॥